Mr. Pramod Trivedi
Senior News Editor
Naiduniya, Indore
डॉक्टर साकेत जती की सीटी की आवाज का सम्मोहन ही आधा दर्द दूर कर देता है ऑपरेशन थियेटर के बड़े-बड़े लैम्प, मास्क लगाए डॉक्टर और ऑपरेट होने का भय। आमतौर पर किसी भी बीमारी या दर्द के इलाज के दौरान यही सब देखने को मिलता है। वर्षों पुराने कमर दर्द से जूझते हुए अपने इलाज के लिए लेकिन जब मैं ऑपरेशन थियेटर में पहुंचा तो अनचाहे भय से मेरा ब्लड प्रेशर लो हो गया। 11 साल से कभी इंजेक्शन से पाला ही नहीं पड़ा था और यहां तो ऑपरेशन थियेटर में आ गया था। ऑपरेट (कमर में इंजेक्शन देकर दर्द दूर करने की तकनीक) डॉ साकेत जती को करना था। नाम काफी सुना था लेकिन वास्ता पहली बार पड़ा था। मेरी हालात देखकर डॉक्टर जती ने कहा कि हम अभी नहीं शाम को इंजेक्ट करेंगे।
कमर को इंजेक्ट करवाना मेरी मजबूरी थी, क्योंकि प्रदेश के सभी बड़े आर्थोपेडिक सर्जन ने हाथ उठा दिए थे। कह दिया था कि आपकी कमर दर्द का कोई इलाज नहीं है। केवल आराम करिए और दर्द सहन करिए। ऐसे में डॉ जती का दावा था कि दुनिया में हर दर्द का इलाज है और हजारों लोगों की तरह आपकी कमर दर्द को तो मैं शर्तिया ठीक कर सकता हूं। हलांकि मुझे विश्वास नहीं हुआ, लेकिन मेरे पास कोई ऑप्शन भी नहीं था। खैर, शाम हुई और मैं मुझे फिर ऑपरेशन थियेटर ले जाया गया। लेकिन जैसे ही ऑपरेशन थियेटर में पहुंचे, डॉक्टर जती ने कहा कि लैम्प बंद करो भाई, क्यों डर पैदा कर रहे हो। फिर मेरे कानों में एक सुरीली सीटी की आवाज गूंजने लगी। डॉ जती गुनगुना रहे थे। उनके होठों से निकलने वाली गुनगुनाहट ने जैसे सम्मोहित कर दिया। मैं 20 मिनिट तक उनकी गुनगुनाहट सुनने में मगन रहा। इस दौरान डॉ जती अपने काम में लगे रहे और बोले कि चलो इंजेक्ट हो गया। मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं था, क्योंकि मैं बिना प्रैक्टिकल के किसी भी बात पर भरोसा नहीं करता। मुझे पता ही नहीं चला कि कब उन्होंने इंजेक्ट किया। उनके व्यवहार और हुनर का कायल हो चुका था, मैं। इंजेक्ट होने के ठीक तीसरे दिन डॉ जती ने पूछा कि दर्द हो रहा है। मैंने कहा कि 80 फीसदी ठीक हो चुका हूं(हलांकि मेरा दर्द 95 फीसदी दूर हो चुका था)। उन्होंने कहा कि घर जाकर 3 दिन पूरी तरह आराम करोगे तो ही डिस्चार्ज करूंगा, वरना रहो अस्पताल में। मैंने वादा किया कि आराम करूंगा तो उन्होंने कहा कि चलिए अपना घर बताईये। मुझे आश्चर्य हुआ कि व्यस्त समय में ऐसा क्यों बोल रहे हैं। मुझे अगले दिन ही समझ आ गया कि उन्होंने क्यों घर छोड़ने का कहा था। अगले दिन मेरे ऑफिस जाने के समय यानी ठीक 11 बजे वो मेरे घर के सामने कार में बैठे थे। मैं आफिस जाने को तैयार था। मेरी चोरी पकड़ी गई थी। उन्होंने कहा, मैंने इसीलिए घर देखा था। मैंने आपकी आंखों से जान लिया था कि आप आराम नहीं करोगे। अगर कुछ घूमना है तो कार में बैठिए, लेकिन ऑफिस नहीं जा सकते। उन्होंने 1 घंटे शहर में घुमाया और आराम की सलाह के साथ चले गए। अगले दिन मुझे कुछ देर के लिए ऑफिस जाना था। मैं ऑफिस पहंुचा ही था कि 5 मिनिट बाद रिशेप्शन से फोन आया कि डॉ जती आए हुए हैं। मैं खुद लेने पहुंचा तो बोले- आप नहीं मानोगे तो फिर चलो हॉस्पिटल। मैंने वादा किया कि पक्का आराम कस्र्ंगा। करीबन एक सप्ताह बाद दोबारा इंजेक्ट किया तो मुझे ऑपरेशन थियेटर का कोई डर नहीं था, क्योंकि मुझे तो डॉक्टर जती के होठों से निकलने वाली सुरीली आवाज सुननी थी। यही हुआ, उन्होंने सीटी बजाना शुरू की और 20 मिनिट बाद ऑपरेशन थियेटर से बाहर। दो दिन घर। 20 साल के दर्द से निजात मिल चुका था और डॉ साकेत जती के रूप में एक अभिन्न् मित्र भी।